Bajrangi ke Pyar me kahi Pagal na Ho Jaau Lyrics – Bhakti Sangeet

बजरंगी के प्यार मै कही पागल ना हो जाऊ

बजरंगी के प्यार मै कही पागल ना हो जाऊ

सिर सोहने का मुकट विराजे,
गल मोतियाँ की माला साजे,
इस की माला को देख के,
कही पागल न हो जाऊ,

पाव में पजनिया छम छम बजे,
भगता के संग छम छम नाचे,
इस की छम छम को देखके कही पागल न हो जाऊ,
इस बजरंगी के प्यार मै कही पागल ना हो जाऊ,

एक हाथ में गधा विराजे दूजे हाथ में पर्वत साजे,
इसके पर्वत तो देखके कही पागल न हो जाऊ,
बजरंगी के प्यार मै कही पागल ना हो जाऊ