Kanha Aan Padi Mai Tere Dwar कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार – Hindi Lyrics – Bhakti Sangeet

 

Kanha Aan Padi Mai Tere Dwar कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार




कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार
मोहे चाकर साँझ निहार
कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार

तू जिसे चाहे ऐसी नही मई
हा तेरी राधा जैसी नही मई
फिर भी हू कैसी वैसी नही मई
कृष्णा मोहे देख तो ले एक बार

कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार
कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार

बूँद ही बूँद मई प्यार की चुनकर
प्यासी रही पर लाई हू गिरधर
टूट ही जाए आश् की गगर मोहना
ऐसी कंकारिया नही मार

कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार
कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार

माटी करो या स्वर्ग बना लो
टन को मेरे चर्नो से लगा लो
मुरली साँझ हाथो मे उठा लो
कच्चू अब है कृशन मुरारी

कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार
मोहे चाकर साँझ निहार
चाकर साँझ निहार, चाकर साँझ निहार
कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार
तेरे द्वार, कान्हा, कान्हा आन पड़ी मई तेरे द्वार

 

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